रिश्ते मोम की तरह होतें हैं.......निखरते हैं रिश्ते बननें के बाद और पिघलते हैं रिश्ते जलने के बाद !


अपने जीवन में रिश्तों को अहमियत दें.........एक बार जो रिश्ता बनाएँ तो उसे पूरी तरह निभाएं, 
रिश्तों की संख्या भले ही आपके जीवन में कम हो, लेकिन उनमें मजबूती हो, प्यार हो.......रिश्तों कि मात्रा नहीं, रिश्तों में गुणवत्ता सर्वोपरि हो, रिश्तों को संख्या से नहीं बल्कि उनमें कितनी मजबूती है उससे तौला जाना चाहिए !

रिश्तों कि कोई मांग न हो, रिश्तों में जब भी तुम्हारे हाथ खुलें तो सिर्फ दूसरों को कुछ देने के लिए खुलें उनसे लेने के लिए नहीं, 

तुम्हारे शब्द किसी और के चेहरे की मुस्कान बनें.......,
न कि जख्म और न ही कृपाण बनें !

कदम तुम्हारे जिधर पड़ें, उन क़दमों के तले रिश्तों के फूल न हों,
रिश्तों के वृक्ष की, हर शाखा को सम्मान मिले कोई छोटे-बड़े की भूल न हो !

रिश्ते जीते जाते हैं-झुका के मस्तक, झुकने में कोई हार नहीं,
बढता है कद झुकने से यारों और घटता कोई प्यार नहीं !

बंद मुटठी जब तक है वो लाख की....... और जब उठा दी ऊँगली, तो समझो रिश्तों की कीमत ख़ाक की, शब्द नहीं आंखें भी रिश्तों में बहुत कुछ कह जाती हैं......पूछो यह तुम उस माँ से जो अपनों के सपनों में घुटती-घटती रह जाती है और इमारत को खड़ा करनें में झोपड़ी सी वह ढह जाती है ! 

कदम हमारे जो चलें सही राह पर, रिश्तों को एक दिन मंजिल मिल जायेगी......, 

पूछो यह तुम उस पिता से जिसने लुटा दिया है सबकुछ तुम पर, शायद ही अब उसकी फटी जेब कभी सिल पायेगी......! 

कान तुम्हारे जब कुछ मीठा सुनना चाहें, अपने शब्दों को तुम सुन लेना........कानों को जो अगर सही लगें तो औरों के लिए भी उन शब्दों को ही चुन लेना......सांसों को अपनी ख्याल है तुमको, लेकिन रिश्तों कि सांसों का भी ध्यान रहे, अपनी-सबकी सांसों का रिश्तों में मान रहे और हर चहरे पर मुस्कान रहे !

रिश्तों को जो जीना है तो विष का प्याला पी लेना........
शब्द दुधारी तलवार है यारों, 
कुछ पाना है-निभाना है,
तो अपने होठों को सी लेना...अपने होठों को सी लेना ! 

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