परिभाषाएं....!
जिंदगी
वादे नहीं.....इरादे हैं मजबूत जिनके, गिरते नहीं वो तूफानों से.......
बुलंद हैं जो अरमां, लग जायेंगे पर हौसलों को,
मंजिलें हैं सिर्फ मकसद जिनका, डरते नहीं उड़ानों से.....!
माँ
मासूम से चेहरे पर चिंता की लकीरें,
और पथराई सी आंखों में अनसुलझी तस्वीरें......
माँ थी वो.....हाँ माँ थी वो, पर मा-टी हो गई,
घुल-घुल कर वो धीरे-धीरे.....
अब ढूंढ रहा हूँ - तू गई कहाँ है,
गुम हो गई पर वो गंगा तीरे - गंगा तीरे......!
पिता
पापा की उंगुली पकड़-पकड़ कर,
जाने कब में कंधे तक पहुँच गया......
छाले पड़ गए पैरों पर उसके ,
मुझको मंजिल तक पहुंचाने को.......
छिल गए हाथ उसके, मेरी राह से काटों को हटाने को,
आज मांग रहा है वो मेरी उंगुली,
देख रहा है वो अब, जब राह मेरी.......
समय नहीं है आने को...... समय नहीं है आने को !
वादे नहीं.....इरादे हैं मजबूत जिनके, गिरते नहीं वो तूफानों से.......
बुलंद हैं जो अरमां, लग जायेंगे पर हौसलों को,
मंजिलें हैं सिर्फ मकसद जिनका, डरते नहीं उड़ानों से.....!
माँ
मासूम से चेहरे पर चिंता की लकीरें,
और पथराई सी आंखों में अनसुलझी तस्वीरें......
माँ थी वो.....हाँ माँ थी वो, पर मा-टी हो गई,
घुल-घुल कर वो धीरे-धीरे.....
अब ढूंढ रहा हूँ - तू गई कहाँ है,
गुम हो गई पर वो गंगा तीरे - गंगा तीरे......!
पिता
पापा की उंगुली पकड़-पकड़ कर,
जाने कब में कंधे तक पहुँच गया......
छाले पड़ गए पैरों पर उसके ,
मुझको मंजिल तक पहुंचाने को.......
छिल गए हाथ उसके, मेरी राह से काटों को हटाने को,
आज मांग रहा है वो मेरी उंगुली,
देख रहा है वो अब, जब राह मेरी.......
समय नहीं है आने को...... समय नहीं है आने को !
बचपन
भाग हो गया बचपन उसका, मेरी भागम-भाग में,
भाग हो गया बचपन उसका, मेरी भागम-भाग में,
राह देखती फिसलन-पट्टी, झूले उसका....... अमरूदों के बाग़ में,
प्रश्न बढ़े हैं,जवाब नहीं हैं..... पढ़ लो मुझको मेरे पापा,
इससे पहले .....खो जाऊं जो क़िताब में,
बहुतेरी हैं बातें.....और स्कूल के किस्से , राह देख पर सो गया देखो,
दिन-भर में न पा सका, अब ढूंढ रहा है मुझको अपने ख्वाब में.....
ढूंढ रहा है मुझको अपने ख्वाब में.....!
इससे पहले .....खो जाऊं जो क़िताब में,
बहुतेरी हैं बातें.....और स्कूल के किस्से , राह देख पर सो गया देखो,
दिन-भर में न पा सका, अब ढूंढ रहा है मुझको अपने ख्वाब में.....
ढूंढ रहा है मुझको अपने ख्वाब में.....!
रिश्ते
रिश्ते बिखरते जातें हैं बनने से पहले,
और मांगती है हिसाब जिंदगी यहाँ चलने से पहले......
सूरज की तरह रोशन हैं रिश्ते, ढलने से पहले,
और अँधेरी रात में पुनम का चाँद से हैं रिश्ते.....
हिमालय से विशाल हैं रिश्ते.....टूटने और पिघलने से पहले !
और मांगती है हिसाब जिंदगी यहाँ चलने से पहले......
सूरज की तरह रोशन हैं रिश्ते, ढलने से पहले,
और अँधेरी रात में पुनम का चाँद से हैं रिश्ते.....
हिमालय से विशाल हैं रिश्ते.....टूटने और पिघलने से पहले !
मुस्कान
चाँद सा शीतल बन, हवा की तरह बह जाना है,
हीरों को जो पाना है तो, मुटठी अपनी खोल दो….
चहेरे पर मुस्कान रहे और उन्मुक्त हमारा मन
हो,
माना खारा है पानी मगर, तुम मिश्री उसमें
घोल दो….
सारे बंधन खोल दो... बंधन सारे खोल दो !
मौन
मौन और मन दोनों की ताक़त का इस्तेमाल करें ,
दोनों को अपने जीवन में सर्वोच्च स्थान दें....
मन शांत है तो मौन की गूंज बहुत देर तक रहेगी.....
और दूर तक जाएगी !
मौन
मौन और मन दोनों की ताक़त का इस्तेमाल करें ,
दोनों को अपने जीवन में सर्वोच्च स्थान दें....
मन शांत है तो मौन की गूंज बहुत देर तक रहेगी.....
और दूर तक जाएगी !
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