गुरु का पर्व...... सबसे बड़ा पर्व है !



गुरु का पर्व.....सबसे बड़ा पर्व है,

क्योंकि हर गुरु हमारे जीवन-सफर में कहीं न कहीं, कभी न कभी- हमारे रास्तों को रोशन करते चलते हैं, हमारे अंदर के ज्ञान को रोशन और दने के सुख का विस्तार करते चलते हैं, पुराने जमाने में हमारे माता-पिता, दादा-दादी हमेशा हमें गुरुओं की वाणी, उनके विचार- उनकी कहानियां हमें अक्सर सुनाते थे जो की आज भी हमारे भीतर, हर कण-कण में रच-बस गए हैं, और जो कहानियां और विचार हमें सदा प्रेरित करती रहती हैं, हमें अपनी मंजिल की तरफ आगे ही आगे को बढ़ने को......उनके विचारों, उनके संस्कारों को मानना और उन्हें दिल से अपनाना ही असल में गुरु का पर्व है और सही मायनों में अपने गुरु की दक्षिणा है !

सदा गुरु-पर्व मनाते चलें, हर दिन-हर क्षण एक पर्व हो....मात्र पर्व का इन्तजार ना हो,

हर क्षण  एक उत्सव हो.....जीवन एक उत्सव हो, बस एक बार उस उत्सव का आनन्द लेकर तो देखिये !



Comments

Popular posts from this blog

कोई भी चीज स्थाई नहीं है.... सब बदलता है !

अपने ख़राब समय में रफ़्तार की बजाय सयंम को तवज्जो दें !

गुरुर से छुट जातें हैं पराये और हर अपने भी दूर होते हैं !