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जीवन को जीने के सिर्फ दो ही तरीके हैं- या तो कहो उसको 'ओके' या तो जी लो उसको 'रो के' !

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अगर आप हँस कर कठिनाइयों को, परिस्थितियों को स्वीकार नहीं भी करेंगें तो भी वह बदलने वाली नहीं हैं I बस फर्क इतना पडेगा की आप अपने जीवन में हमेशा एक वजन को लेकर चलते रहेंगें, इससे बेहतर यह है की उन कठिनाइयों को ओके कहें-स्वीकार करें, वह जैसी भी हैं उनका प्रतिरोध न करें, उनका मुकाबला करें और उन्हें समय दें ताकि वह अपने आप आपके जीवन से निकल जाएँ न की रोके उनको अपने जीवन का सदा के लिए हिस्सा बना लें या बनने दें, रोने से कुछ हासिल नहीं होगा परिस्थितियां बदलने वाली नहीं है इसलिए खुद बदल जाएँ और हँस कर उनका मुकाबला करें I जीने के बस दो ही तरीके है: मुश्किलों को कह दो ‘ओके’ या फिर उलझे रहो उनमें ‘रो-रोके’ I चोइस आपकी है क्योंकि जिंदगी भी आपकी है I चुनना आपको है क्योंकि अपना जीवन बुनना आपको है I

कृष्ण उपदेश....गीता सार !

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जब  महाभारत का युद्ध चरम पर था और अर्जुन पेशोपेश में थे, तो  कृष्ण ने उन्हें रणभूमि में ही गीता का उपदेश दिया  उन्होंने अर्जुन को जो ज्ञान दिया वह आज की परिस्थितियों में भी सार्थक है और आने वाले कल में भी उसकी सार्थकता निश्चित है....और  वही व्यक्ति सफल है जिसने  अपने जीवन में ' गीता' को सही मायनों में 'जीता' है !                                                                       * गीता सार * • क्यों व्यर्थ की चिंता करते हो? किससे व्यर्थ डरते हो? कौन तुम्हें मार सकता है? आत्मा ना पैदा होती है, न मरती है। • जो हुआ, वह अच्छा हुआ, जो हो रहा है, वह अच्छा हो रहा है, जो होगा, वह भी अच्छा ही होगा। तुम भूत का पश्चाताप न करो। भविष्य की चिन्ता न करो। वर्तमान चल रहा है। • तुम्हारा क्या गया, जो तुम रोते हो? तुम क्या लाए थे, जो तुमने खो दिया? तुमने क्या पैदा किया था, जो...

पहले एक्टिंग करिए , मेहनत करिए.....आप सुपर स्टार अपने आप बन जायेंगें !

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‘मैं पहले सुपर-स्टार बनूंगा फिर अपनी एक्टिंग, अपने करियर की शुरुआत करूँगा’.....  इस वक्तव्य में जिस चीज की कमीं झलक रही है वह है 'काम' से पहले 'नाम' की अपेक्षा I   हम और आप में से ज्यादातर लोग सिर्फ नाम की तलाश में अपनी सारी एनर्जी लगा रहें हैं, हमारा सारा प्रयास इसी में होता है कि किस तरह हम ‘बिना काम...चारों तरफ नाम’ कर सकें I   आज ऊपर दिये गए वक्तव्य को देने वाला कलाकार गुमनामी के अन्धेरों में है और  अपने जीवन में अब तक कुछ भी हासिल नहीं कर पा रहा I उसके पास नाम तो दूर आज कोई काम भी नहीं है I अगर उसनें उस समय यह कहा 'मैं पहले एक्टिंग करूँगा और पूरी मेहनत और लगन से अपना काम करूंगा और फिर एक दिन बहुत बड़ा सुपर-स्टार बनूँगा' उसने पहले अपनी एक्टिंग अपने काम, अपनी मेहनत को अपना हथियार बनाया होता तो आज परिस्थितियाँ ऊपर से बिल्कुल विपरीत होतीं और आज वह एक सुपर-स्टार होता न कि गुमनामी के अँधेरे में I क्यों, हम वह सब वह पाना चाहते है पर जिनके लिए हम प्रयास नहीं करना चाहते हम अपनी थाली पूरी तरह सजी ...

अपने होने का कभी ‘अभिमान’ मत करना !

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अपने होने का कभी ‘अभिमान’ मत करना, कभी भी नहीं I जिस दिन यह अभिमान तुम्हारे अंदर आ गया उस दिन से जो ऊँचाइयाँ तुमने देखी हैं तुम्हारा सफर उससे नीचे की तरफ को शुरू हो जाएगा I तुम आज हो कल नहीं होगे यह तय है, वक्त की सुईयां जब सिकंदर से नहीं रुकी तो तुम्हारी क्या हस्त है   और जिस दिन तुम्हें अपने होने का अभिमान हो उस दिन बाहर निकल कर सूरज को देख लेना जो शाम होते-होते ढल जायगा, जितना चाहे चाह कर भी रात में नहीं कभी नहीं निकल सकता, चाहे वह जितना भी ताकतवर क्यों न हो I चढ़ता सूरज धीरे धीरे ढलता है ढल जायेगा  ढल जायेगा ढल जायेगा  खाली हाथ आया है खाली हाथ जायेगा जानकर भी अन्जाना बन रहा है दीवाने आज तक ये देखा है पानेवाले खोता है ज़िन्दगी को जो समझा ज़िन्दगी पे रोता है मौत ने ज़माने को ये समा दिखा डाला कैसे कैसे रुस्तम को खाक में मिला डाला याद रख सिकन्दर के हौसले तो आली थे जब गया था दुनिया से दोनो हाथ खाली थे अब ना वो हलाकू है और ना उसके साथी हैं जंग जो न पोरस है और न उसके हाथी हैं चढ़ता सूरज धीरे धीरे ढलता है ढल जायेगा  ढल जायेगा ढल जायेगा  ‘अभी-मान’...

बड़ी-बड़ी शेखी मारने वाले लोग, ढोल की तरह ही अंदर से खोखले होते हैं ।

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एक बार एक जंगल के निकट दो राजाओं के बीच घोर युद्ध हुआ। एक जीता दूसरा हारा। सेनाएं अपने नगरों को लौट गईं। बस , सेना का एक ढोल पीछे रह गया। उस ढोल को बजा-बजाकर सेना के साथ गए भाट व चारण रात को वीरता की कहानियां सुनाते थे। युद्ध के बाद एक दिन आंधी आई। आंधी के जोर में वह ढोल लुढ़कता-पुढ़कता एक सूखे पेड़ के पास जाकर टिक गया। उस पेड़ की सूखी टहनियां ढोल से इस तरह से सट गई थीं कि तेज हवा चलते ही ढोल पर टकरा जाती थीं और  ढमाढम - ढमाढम  की गुंजायमान आवाज होती। एक  सियार  उस क्षेत्र में घूमता था। उसने ढोल की आवाज सुनी। वह बड़ा भयभीत हुआ। ऐसी अजीब आवाज बोलते पहले उसने किसी जानवर को नहीं सुना था। वह सोचने लगा कि यह कैसा जानवर है , जो ऐसी जोरदार बोली बोलता है ' ढमाढम ' । सियार छिपकर ढोल को देखता रहता , यह जानने के लिए कि यह जीव उड़ने वाला है या चार टांगों पर दौड़ने वाला। एक दिन सियार झाड़ी के पीछे छुपकर ढोल पर नजर रखे था। तभी पेड़ से नीचे उतरती हुई एक गिलहरी कूदकर ढोल पर उतरी। हलकी-सी ढम की आवाज भी हुई। गिलहरी ढोल पर बैठी दाना कुतरती रही। सियार बड...

दूसरे की हार में, अपनी जीत देखने वालों को कभी भी जीत नसीब नहीं होती ...!

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हल्की-हल्की बारिश हो रही थी और बारिश का पानी जमीन पर था, इससे पहले की पानी और बड़े नीचे खड़ी एक छोटी चींटी ने उससे बचने के लिए पास की दीवार पर चढ़ने की सोची, लेकिन चींटी बार-बार दीवार पर चढ़ने का प्रयास करती पर कुछ ऊपर जाती की वापिस नीचे जमीन पर गिर जाती, एक चींटा नीचे खडा हो कर यह सब देख रहा था चींटीं को बार गिरते देख खुश हो रहा था, की इसके बस का काम नहीं है अब यह नहीं बचेगी, उसकी हार में, उसके गिरने में उसको आनन्द आ रहा था वह उसके प्रयासों का मजाक बना रहा था,  अब बारिश और  भी तेज हो चुकी थी, जमीन पर  पानी का बहाव भी धीरे-धीरे बढने लगा था  चींटीं ने एक बार फिर हिम्मत जुटाई और अपनी सारी शक्ति के फिर दीवार पर चड़ने का प्रयास किया,  चींटी का अपने पर विश्वास और उसकी हिम्मत व मेहनत रंग लाई, उसका बिना रुके निरंतर किया गया प्रयास आखिर सफल हुआ और वह कुछ ही देर में दीवार की मुंडेर पर थी, सिर्फ इसलिए क्योंकि उसने हार नहीं मानी और अपना प्रयास निरंतर जारी रखा इस बात से बेखबर और बिना विचलित हुए की नीचे बेठा चींटा उसके बारे में क्या कह रहा है, क्या सोच रहा है ! ते...

‘Husband’ और ‘Wife’ की जोड़ी अगर एक ‘Broadband’ और दूसरा ‘Wi-Fi’ की तरह काम करे तो अपना घर-परिवार बहुत अच्छी तरह से चला सकतें हैं !

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‘घर’ एक ‘मंदिर’ कि तरह होता है लेकिन तभी , जब आप घर के हर सदस्य की भगवान कि तरह पूजा करतें हैं, उनका बखूभी ख्याल रखतें हैं, चाहे वो घर के बड़े-बुजुर्ग हों या फिर बच्चे हों सबको साथ लेकर चलने कि कला अगर आप में है तो आपका ‘घर’ वाकई में एक ‘मंदिर’ है अन्यथा नहीं ! घर को मंदिर बनाने के दो अहम किरदार हैं - पति और पत्नी, यानि ‘ हसबैंड ’ और ‘वाइफ’ जी हाँ, ‘Husband’ और ‘Wife’ की यह जोड़ी अगर एक ‘ Broadband ’ और दूसरा ‘ Wi-Fi ’ की तरह काम करे तो अपना घर-परिवार, अपना और अपनों का जीवन बहुत अच्छी तरह से चला सकतें हैं ! ‘ Broadband ’ क्या है, जी हाँ Broadband का मतलब है की एक उच्च क्षमता की तकनीक जो की अलग-अलग फ्रीक्वेन्सी का इस्तेमाल कर एक समय में ज्यादा से ज्यादा सिग्नल या मेसेज एक साथ ट्रांसफर कर सके, Husband का भी घर में, परिवार में यही रोल होना चाहिए एक broadband की तरह वह भी पूर्ण सक्षम होना चाहिए, उसमें भी उच्च क्षमता होनी चाहिए की घर के अलग अलग विचारधारा, अलग-अलग frequency के लोगों को एक साथ ले कर , उनमें  तालमेल बनाकर चले और उनमें आपसी सामंजस्ये बनाए रखे, घर ...