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वक्त जैसा भी हो उसमें कायम रहें !

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वक्त जबरदस्त है, जब  निकल जाता है तो भी परेशान करता है,  बार-बार वक्त निकलने और कुछ न कर पाने का गम का,  ठीक इसी तरह अपना सही वक्त नहीं आने का दुःख...., जी हाँ यानी सही वक़्त निकल जाने का गम या फिर सही वक्त नहीं आने का गम.....,  यानी हर दम जीवन में एक बोझ....और वो भी वह बोझ जिसका जीवन में वास्तव में कोई कोई वजूद  है ही नहीं....!                                                                 वक्त जैसा भी हो उसमें कायम रहें, अगर सही नहीं भी है तो भी अपने को कायम रखें क्योंकि वक्त का बदलना तय है, कब और कैसे यह वक्त की कोख  में है, बस इंतज़ार करिए न रुके......न भागे, यही जीवन है.....!  जिंदगी के सफर में कभी जीत होगी तो कभी हार भी, कभी खुशियां होंगी तो कभी गम भी पर  में भी विचलित या भटकने से बचें, क्योंकि जितनी सांसें भगवान् ने तुम्हारी लिखीं हैं ...

जिंदगी, तू काश एक परिंदे सी हो...पंख खोलूं तो उड़ान हो, नजर सदा जमीं पर रहे और मंजिल-मेरी आसमान हो !

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जिंदगी बहुत बेशकीमती है, एक खूबसूरत  दिया हुआ  तोहफा है ईश्वर का-आपको... इस जीवन का सम्मान करें और इसको खुलकर जियें, एक आजाद पंछी की तरह-जिसकी उड़ान का कोई दायरा नहीं, न उसमें ऊंचाई का कोई बंधन,  एक उन्मुक्त- एक अनंन्त उड़ान, न मंजिल की चाहा न कुछ खोने का गम ! एक परिंदे की तरह अपने सफर के हर पल का आनंद लीजिये.....सिर्फ यही क्षण के आप  मालिक हैं, सिर्फ यही क्षण आपका है-जो बीत गई, सो बात गई, और जो आने क्षण आने वाला है उस पर तुम्हारा कोई अधिकार नहीं, सिर्फ और सिर्फ यही क्षण तुम्हारा है ! जिंदगी, तू काश एक परिंदे सी हो....पंख खोलूं  तो उड़ान हो, नजर सदा जमीं पर हो और मंजिल....और मंजिल -मेरी आसमान हो !  जब  हमारे सामने खुशियाँ होती हैं तो हमारे पास वक्त नहीं होता, और जब  हमारे पास वक्त होता है  तो हम  खुशियों का आनंद लेने के काबिल नहीं होते.....वक्त हाथ से निकल गया होता है! अगर आप गौर से देखें तो पायेंगें की आपके आस-पास सब है, बस  जो नहीं है वो है आपकी इच...

मोह-माया से बचें-जहां मोह होगा...माया उस तरफ ही जायेगी !

जहां मोह होगा....  माया उस तरफ ही जायेगी, इसलिए मोह और माया से बचें, न मोह होगा-न माया जायेगी !  मोह से मुक्त हों...माया से मुक्त हों, जो हिस्से का है, हिस्से में जरूर आएगा...., पर इसके लिए आपको अपने दायरों से बाहर निकलना होगा, अपने बंधनो से मुक्त होना होगा, अपने सारे  बंधन  खोल दें  ! मोह हमेशा नुक्सान पहुंचाता है, मोह से मुक्त होंगें तभी उन्मुक्त हो पायेंगें, आपका मोह आपके पास की माया को आपके पास नहीं टिकने देता, आपकी माया आपके मोह की बलि चढ़ जाती है, इसलिए माया तभी टिकेगी जब किसी को पाने का, या किसी के खो जाने का मोह आपके जीवन में नहीं होगा.....! यही सत्य है,  यही शिव है, यही सुन्दर भी है,  इसलिए मोह-माया से बचें.....!

आपकी जिंदगी कि किताब बहुत खूबसूरत है, उसको संजों कर और सजा कर रखें !

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किसी भी कॉपी को ‘fair’  या  ‘rough’ कहना आपके हाथ में है, उस कॉपी में आपने क्या लिखा है, किस तरह का काम किया है, किस तरह कि लकीरें मारीं हैं वह ही बताती है कि कॉपी ‘fair’ है या  ‘rough’ है ! ठीक यही हाल, ‘जिंदगी’ का भी है - आप उस को किस तरह रखें हुए हैं, किस तरह के रंग उसमें भर रहें हैं, बेतरतीब या व्यवस्थित तरीके से उसको जी रहें हैं, आप उस पर किस तरह कि लकीरें खींच रहें हैं-सकारात्मक या नकारात्मक, अपनी जिंदगी के पन्नों को काला कर रहें हैं या उसमें खुशियों के रंग भर रहे हैं, अपने भविष्य के शब्दों को मोतियों कि तरह लिख रहें हैं-यही वह सब बातें हैं जो किसी कि भी जिंदगी को   ‘fair’   या   ‘rough’ बना सकती है, आप भी जरा अपनी जिंदगी में एक बार झांक कर देखिये कहीं आप भी अपनी अच्छी खासी ' fair'  जिंदगी को ' rough'  तो नहीं बना रहे ! आपकी जिंदगी कि किताब बहुत खूबसूरत है, उसको संजों कर और सजा कर रखें ताकि लोग आपकी मिसाल दें और आपकी तरह बनना चाहें, खूबसरत लोग, खूबसूरत व्यक्तित्व सदा दूसरों को अपनी और आकर्षित करतें हैं, आप जितने सक...

अगर आप सपने देखतें हैं तो अपने सपनों को बेचना सीखिए....!

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अगर आप सपने देखतें हैं तो अपने सपनों को बेचना सीखिए.... कहने का तात्पर्य यह है की अगर आप सपने देखतें हैं और उनको पूरा करना चाहते हैं तो आपको जरुरत है उनको बेचने की, यानी सही समय पर और सही जगह पर अपने सपनों को आपको पेश करना आना चाहिए, ताकि लोगों को पता चल सके की आप भी “हैं”, आप भी कुछ कर सकतें हैं, सपने हर कोई देखता है लेकिन सपनों को बेचने की ‘कला’ कुछ ही लोगों के पास होती है, और जिनके पास यह होती है वो पीछे मुड कर कभी नहीं देखते बल्कि अपने सपने बुनतें हैं और उनको हकीकत का जामा पहनातें हैं....! आप भी इस “कला” के कलाकार बन सकतें हैं क्योंकि सपने देखने और सपने पुरे होने में जमीन आसमान का अंतर जरूर है पर यह काम नामुमकिन कतई भी नहीं है,है, इसलिए अपने सपने आज से ही बेचना शुरू कीजिये, हम कुछ भी करने से पहले बहुत सोचतें हैं- क्या होगा, कैसे होगा, कब होगा, कौन करेगा, नहीं भी होगा तो चलेगा, कौन क्या बोलेगा........इत्यादि-इत्यादि, अगर सपनों के “सौदागर” बनना है तो इन सभी बातों का त्याग करना होगा क्योंकि यह वो नकारात्मक बातें और सोच हैं जो सपने दिखाती तो जरुर हैं पर उनको पूरा कभी नहीं...

आप क्या करना चाहेंगे, मिसाल देना या मिसाल बनना !

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मिसाल देने में मात्र दस सेकंड लगतें हैं.....किन्तु मिसाल बनने में दस साल या उससे भी कई ज्यादा वर्ष लग जातें हैं ! तो फिर आप क्या करना चाहेंगे, मिसाल देना या मिसाल बनना , कुछ चीजें जल्दी होती हैं पर कुछ क्षण चलती हैं ओर कुछ चीजें समय लेती हैं पर लंबे समय तक चलती हैं, यह आप पर निर्भर करता है की “आप मिसालें तलाशना चाहते हैं या फिर मिसालें कायम करना”,  ऐसा बनिए की लोग आप की मिसाल दें, क्योंकि हममें से ज्यादातर लोग अपना अधिकतम समय मिसालें तलाशनें में लगा रहें हैं ! जिनकी आप मिसाल दें रहें हैं क्या कभी आपने सोचा है की उनमें ओर आप में क्या फर्क है- सिर्फ इतना सा की वो लगातार “गतिमान” है ओर आप लगातार “स्थिर” हैं, वह हार कर भी कभी रुके नहीं ओर आपने जीत के स्वाद कभी चखे नहीं, उसे अपनी मंजिल का भी पता है, उसके रास्ते का भी और अपनी रफ़्तार का भी आपको न मंजिल का पता, न रास्ते का और न रफ़्तार का !  “तालाबों” ने कभी समुन्दर नहीं देखा, “बहता” हुआ पानी ही समुंदर तक पहुंचा है, जो “चलेगा” मंजिल उसी की, मिसाल भी उसी की, जो “परिंदा” शाख से उड़ा नहीं वो कब “घर” तक पहुंचा ह...

"नमन"

नम हर आँख है....., जल रही है वादियाँ, चीड़ भी हैं जल उठे, अंधेरों से लड़ते-लड़ते, बुझ गए  चिराग हैं, टूट गई हैं चूड़ियां और माँ भी स्तब्ध है, जल गए ख़्वाब सब... बेटी पूछती यह कैसी आग है !  हर "जान" की कीमत होती है...., हर "कीमती" जान है, इसका "गुनहगार" कौन है, मांग रही है "बदला" शहादत,   और गूंज रहा "मौन" है ! जो चला गया कितने अरमान समेटे था, और जो रह गए वो भी कितने अरमान समेटे थे, इन अरमानों का हिसाब कौन देगा, जो चले गए वो अधूरे रह गए और जो बचे हैं वह आंसुओं में बह गए....., "नमन हर उस वीर को,  जो झुका नहीं, झुका गया शमशीर को...."